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Green Crackers

Green Crackers : रोशनी और खुशियों का त्योहार दिवाली नजदीक आ गया है और लोग पहले से ही अपने घरों की साफ-सफाई से लेकर नए कपड़े खरीदने तक सारी तैयारियां करने में व्यस्त हैं। दिवाली हिन्दुओं के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे भारत में बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल दीवाली 12 नवंबर, रविवार को मनाई जायेगी। यह दिन अंधेरे पर प्रकाश, निराशा पर आशा और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न है।

इस दिन घरों को रोशनी और दीयों से सजाने, रंगोली बनाने, नए कपड़े पहनने और पूजा करने के अलावा आतिशबाजी और पटाखे भी दिवाली समारोह का हिस्सा हैं। हालांकि पटाखे जलाना मज़ेदार हो सकता है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण पर पारंपरिक पटाखों के हानिकारक प्रभावों के साथ जलवायु पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना भी ज़रूरी है। कई जगहों पर वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल और ध्वनि रहित दिवाली समारोह को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Green Crackers : क्या होते हैं ग्रीन क्रैकर्स?

सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान द्वारा ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) को छोटे खोल वाले पटाखों के रूप में परिभाषित किया गया है। इनमें उत्सर्जन को कम करने के लिए कोई राख या धूल अवरोधक जैसे योजक नहीं होते हैं। इन पटाखों में बेरियम यौगिक नहीं होते हैं, जो उन्हें विशिष्ट हरा रंग देते हैं। बेरियम एक धातु ऑक्साइड है जो हवा को प्रदूषित करता है और शोर का कारण बनता है।

ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) जलाने से जलवाष्प उत्पन्न होती है, जिससे निकलने वाली धूल की मात्रा कम हो जाती है। यह 110 से 125 डेसिबल के बीच ध्वनि उत्पन्न करते हैं, जबकि पारंपरिक पटाखे करीब 160 डेसिबल की ध्वनि उत्पन्न करते है। इससे यह पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम शोर करते हैं।

ऐसे करें ग्रीन क्रैकर्स की पहचान

ग्रीन क्रैकर्स की पहचान सीएसआईआर-नीरी और पीईएसओ के विशिष्ट हरे रंग के लोगो और एक क्यूआर कोड द्वारा की जा सकती है। ग्रीन क्रैकर्स की तीन श्रेणियां होती हैं।

SWAS (सेफ वॉटर रिलीजर) : यह धूल को कम करने के लिए वायुमंडल में जल वाष्प छोड़ता है। यह 30% कम कण उत्सर्जित करता है और इसमें सल्फर या पोटेशियम नाइट्रेट नहीं होता।

STAR (सुरक्षित थर्माइट क्रैकर) : इसमें कोई पोटेशियम नाइट्रेट या सल्फर नहीं होता। यह कम कण उत्सर्जित करता है और ध्वनि की तीव्रता को कम करता है।

SAFAL : इसमें एल्यूमीनियम का न्यूनतम और मैग्नीशियम का अधिक उपयोग होता है। यह पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम शोर पैदा करता है।

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